भारत एक अत्यंत समृद्ध देश था।
भारत एक अत्यंत समृद्ध देश था। यहाँ की कृषि व ग्रामीण व्यवस्था संसार में सर्वश्रेष्ठ थी। हमारी बैलगाड़ी तक भी चाँदी जड़ी होती थी। इसको कमजोर करने व लूटने के विदेशियों ने अनेक षड्यंत्र रचे पर अंग्रेजों के आने तक कोई दूसरी ताकत इसमें सफल नहीं हो पायी। उस समय तक किसान व गाँव पूर्णतः आत्मनिर्भर थे। वे किसी भी तरह के बाजारवाद से दूर रह कर भी उच्चतम स्तर के व्यापारी व बुद्धिजीवी थे। अगर यहाँ की सम्पन्नता की बात करुँ तो यहाँ लोग चाँदी के बदले नमक खरीदते थे। खाद्यपदार्थ, वस्त्र व हरेक तरह की जीवनोपयोगी वस्तुओं का निर्माण हर गाँव में किया जाता था। गोबर का खाद था और गोबर पर ही खाना बनता था। हर घर में चरखा, चक्की व वस्त्र बनाने की खड्डी होती थी। चारपाई, मूढ़े व पीढ़े आदि का बनाना बायें हाथ का खेल था। चमड़ा उद्योग, लोहा उद्योग, काष्ठ उद्योग, खांडसारी, तेल उद्योग, भवन निर्माण व बर्तनों का निर्माण व व्यवसाय हर गाँव में होता था। स्वास्थ्य के क्षेत्र में आयुर्वेद अपने चरम पर था तथा नाड़ी को तो छोड़ो चेहरा देख कर भी वैद्य बीमारी बता देते थे तथा उपचार कर देते थे। किसान स्वयं व गाँव की आवश्यकता ...