Posts

भारत एक अत्यंत समृद्ध देश था।

Image
भारत एक अत्यंत समृद्ध देश था। यहाँ की कृषि व ग्रामीण व्यवस्था संसार में सर्वश्रेष्ठ थी। हमारी बैलगाड़ी तक भी चाँदी जड़ी होती थी। इसको कमजोर करने व लूटने के विदेशियों ने अनेक षड्यंत्र रचे पर अंग्रेजों के आने तक कोई दूसरी ताकत इसमें सफल नहीं हो पायी। उस समय तक किसान व गाँव पूर्णतः आत्मनिर्भर थे। वे किसी भी तरह के बाजारवाद से दूर रह कर भी उच्चतम स्तर के व्यापारी व बुद्धिजीवी थे। अगर यहाँ की सम्पन्नता की बात करुँ तो यहाँ लोग चाँदी के बदले नमक खरीदते थे। खाद्यपदार्थ, वस्त्र व हरेक तरह की जीवनोपयोगी वस्तुओं का निर्माण हर गाँव में किया जाता था। गोबर का खाद था और गोबर पर ही खाना बनता था। हर घर में चरखा, चक्की व वस्त्र बनाने की खड्डी होती थी। चारपाई, मूढ़े  व पीढ़े आदि का बनाना बायें हाथ का खेल था। चमड़ा उद्योग, लोहा उद्योग, काष्ठ उद्योग, खांडसारी, तेल उद्योग, भवन निर्माण व बर्तनों का निर्माण व व्यवसाय हर गाँव में होता था। स्वास्थ्य के क्षेत्र में आयुर्वेद अपने चरम पर था तथा नाड़ी को तो छोड़ो चेहरा देख कर भी वैद्य बीमारी बता देते थे तथा उपचार कर देते थे। किसान स्वयं व गाँव की आवश्यकता ...

मेरे_पापा_की_औकात

Image
मेरे_पापा_की_औकात पाँच दिन की छूट्टियाँ बिता कर जब ससुराल पहुँची तो पति घर के सामने स्वागत में खड़े थे। अंदर प्रवेश किया तो छोटे से गैराज में चमचमाती गाड़ी खड़ी थी स्विफ्ट डिजायर! मैंने आँखों ही आँखों से पति से प्रश्न किया तो उन्होंने गाड़ी की चाबियाँ थमाकर कहा:-"कल से तुम इस गाड़ी में कॉलेज जाओगी प्रोफेसर साहिबा!" "ओह माय गॉड!!'' ख़ुशी इतनी थी कि मुँह से और कुछ निकला ही नही। बस जोश और भावावेश में मैंने तहसीलदार साहब को एक जोरदार झप्पी देदी और अमरबेल की तरह उनसे लिपट गई। उनका गिफ्ट देने का तरीका भी अजीब हुआ करता है। सब कुछ चुपचाप और अचानक!! खुद के पास पुरानी इंडिगो है और मेरे लिए और भी महंगी खरीद लाए। 6 साल की शादीशुदा जिंदगी में इस आदमी ने न जाने कितने गिफ्ट दिए। गिनती करती हूँ तो थक जाती हूँ। ईमानदार है रिश्वत नही लेते । मग़र खर्चीले इतने कि उधार के पैसे लाकर गिफ्ट खरीद लाते है। लम्बी सी झप्पी के बाद मैं अलग हुई तो गाडी का निरक्षण करने लगी। मेरा फसन्दीदा कलर था। बहुत सुंदर थी। फिर नजर उस जगह गई जहाँ मेरी स्कूटी खड़ी रहती थी। हठात! वो जगह तो खाली थी। "स...

रामायण क्या है ?

Image
रामायण क्या है ? • रामायण महज एक काल्पनिक कहानी है। जिसको वास्तविक घटना साबित करने के लिए आज मनुवादी लोग हजारों तरह के ढोंग और पाखंड कर रहे है। कहानी के साथ कहानियां जोड़ कर देश के मूलनिवासियों को बेवकूफ बना कर जबरदस्ती हिन्दू धर्म को मानने पर मजबूर कर रहे है। राजा पुष्यमित्र शुंग के दरबार के एक कवि "वाल्मीकि ने रामायण नामक काल्पनिक कहानी लिखी थी और मनुवादियों ने उस कहानी का प्रचार-प्रसार किया। इसी कहानी के दम पर आज भी मनुवादी लोग इस देश के सीधे-साधे मूलनिवासियों पर मानसिक रूप से राज कर रहे है और मनुवादियों के जाल में फंसे सभी मूलनिवासी आज भी हिन्दू धर्म को निभा रहे है। आज रामायण के साथ हजारों कहानियां जोड़ी जा चुकी है और लगातार जोड़ी जा रही है। काल्पनिक तथ्यों के आधार पर रामायण को देश के इतिहास तक से जोड़ा जा चूका है। लेकिन तार्किक दृष्टि से देखा जाये तो आसानी से समझ में आ जाता है कि रामायण महज एक काल्पनिक कहानी है। मैं इस लेख के माध्यम से इस देश के सभी मूलनिवासियों को रामायण की सच्चाई से रूबरू करवाना चाहती हूँ कि आखिर सच्चाई क्या है? आज से बहुत समय पहले लगभग 269-185 ईसा पूर्व मे...

टेस्ट ट्यूब बेबी गीता प्रेस

Image
धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी। उसके 100 पुत्र और एक पुत्री। सभी लोग सवाल करते हैं कि जब 100 वें पुत्र ने जनम लिया तब पहले पुत्र की आयु क्या थी ? अब जो अंड भगत है वह सिर्फ इतना ही जवाब देते है या यूं कहो कि जवाब देने की जगह उल्टा सवाल करते है कि स्टेम सेल का नाम सुना है, टेस्ट ट्यूब बेबी का नाम सुना है ? यानी वह कहना तो चाहते है कि टेस्ट ट्यूब बेबी की तरह एक साथ 101 बच्चों का निर्माण टेस्ट ट्यूब में किया गया, पर कह नहीं पाते। आधुनिक विज्ञान ने पुरुष का स्पर्म और स्त्री का अंडाणु को लेबोरेटरी या टेस्ट ट्यूब में मिलन करवाया जाता है । जिससे भ्रूण तैयार होता है। स्पर्म और अंडाणु के मिलन के 5 दिन पश्चात ही औरत के गर्भ में डाल दिया जाता है। 9 महीने पश्चात बच्चा पूर्ण विकसित हो कर बाहर आ जाता है। स्पर्म और अंडाणु में एक कोशिका के मुकाबले आधे आधे गुण सूत्र होते है। पुरुष स्पर्म में पुरुष कोशिका के आधे गुण सूत्र और अंडाणु में स्त्री की कोशिका के आधे गुण सूत्र। मिलने से एक पूर्ण नई कोशिका का निर्माण होता है। वैज्ञानिक यह कोशिश कर रहे है कि अंडाणु से स्त्री के गुण सूत्र निकाल कर पुरुष कोशिका से पूरे...

कहानी_देश_भक्त_भगत_सिंह_जी_की_आस्तिक_से_नास्तिक

Image
#कहानी_देश_भक्त_भगत_सिंह_जी_की_आस्तिक_से_नास्तिक अगर आप सच्चे देशभक्त है तो भगतसिंह जी के जीवन कहानी को जरूर पढ़ेंगे। और आज जो आडंबर ढकोसला करके देश को बहुत पीछे करने की साजिश चल रही है उसे समझ पाएंगे।  23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में भगत सिंह और उनके साथी हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर चढ़ गए थे. शहीद भगत सिंह खुद को एक पक्का नास्तिक मानते थे. अंतिम समय तक उन्होंने ईश्वर की सत्ता को स्वीकार नहीं किया. जेल में रहते हुए उन्होंने 'मैं नास्तिक क्यों हूं' शीर्षक से एक लेख लिखा था. इस लेख में उन्होंने ईश्वर और धर्म की सत्ता पर अनेक तर्कपूर्ण सवाल खड़े किए हैं. यहां इस लेख के कुछ अंश पढ़िए और जानिए ईश्वर और धर्म पर क्रान्तिकारी भगत सिंह के विचार..मैंने तो ईश्वर पर विश्वास करना तब छोड़ दिया था, जब मैं एक अप्रसिद्ध नौजवान था. मेरे बाबा, जिनके प्रभाव में मैं बड़ा हुआ, एक रूढ़िवादी आर्य समाजी हैं. एक आर्य समाजी और कुछ भी हो, नास्तिक नहीं होता. अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद मैंने डी. ए. वी. स्कूल, लाहौर में प्रवेश लिया और पूरे एक साल उसके छात्रावास में रहा. वहाँ सुबह और शा...

आचार्य चाणक्य कहते हैं

Image
#हमें कुछ समय के लिए आचार्य  चाणक्य को अपना मार्गदर्शक बनाकर और अनुकूलनवादी रणनीति अपनाकर लोकतंत्र अथवा जनता की लड़ाई लड़नी चाहिए... आचार्य चाणक्य कहते हैं : "संकट में अनुकूलन का मार्ग अपनाने पर ही रक्षा संभव है ।" हमारा कहना है रक्षा भी होगी और हम अपना कार्य भी बख़ूबी कर सकते हैं...कार्य अर्थात आंदोलन या क्रांतिकारी अभियान आगे बढ़ा सकते हैं । चाणक्य यह भी कहते हैं कि शत्रु को शत्रु की ही नीति एवं हथियारों से परास्त करो । अनुकूलन और शत्रु की नीति...इन दोनों सूत्रों को मिला दें तो हमारे लिए एक शानदार रास्ता निकलता है...वह रास्ता है कि हम महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता के पद से हटाकर गुरु रवींद्र नाथ टैगोर को राष्ट्रपिता बनाए जाने संबंधी आंदोलन छेड़ें...इस आंदोलन के लिए शानदार राष्ट्रीय तर्क हमारे पास है क्योंकि गांधी ने सरदार भगतसिंह, सुभाष चंद्र बोस और सरदार वल्लभभाई पटेल इन तीनों के साथ बेईमानी और अनैतिक तथा राष्ट्र विरोधी व्यवहार किया...यह इतना बड़ा अपराध है कि उन्हें राष्ट्रपिता की उपाधि देना तो दूर सम्मान से याद करना भी इस राष्ट्र और यहां के जन-गण का अपमान है......

क्या अंग्रेज बुरे थे?

Image
*👉 क्या अंग्रेज बुरे थे? 🤔* *#नरबलि :-*  जो कि शूद्रों की दी जाती थी। अंग्रेजों ने इसे रोकने के लिए 1830 में #कानून बनाया था। *#ब्राह्मण_जज_पर_रोक :-*  सन 1919 ईस्वी में अंग्रेजों ने ब्राह्मणों के जज बनने पर रोक लगा दी थी, अंग्रेजों ने कहा था कि इनका चरित्र न्यायिक नहीं होता है। *#शासन_में_ब्राह्मण :-* शासन व्यवस्था पर ब्राह्मणों का 100% कब्जा था। अंग्रेजों ने इन्हें 2.5% पर लाकर खड़ा कर दिया था। *#सम्पत्ति_का_अधिकार :-*  अंग्रेजों ने अधिनियम 11 के तहत शूद्रों को 1795 ईस्वी में संपत्ति रखने का अधिकार दिया था। *#देवदासी_प्रथा :-*  अंग्रेजों ने ही बंद कराई, इस प्रथा में यह होता था कि शूद्र समाज की लडकियाँ #मंदिरों_में_देवदासी के रूप में रहती थीं,पंडा-पुजारी उनके साथ छोटी उम्र में बलात्कार करना शुरू कर देते थे और उनसे जो बच्चा पैदा होता था , उसे हरिजन कहते थे। *#नववधू_शुद्धिकरण_प्रथा :-*  सन 1819 से पहले किसी शूद्र की शादी होती थी, तो ब्राह्मण उसका शुद्धीकरण करने के लिए नववधू को 3 दिन अपने पास रखते थे, उसके उपरांत उसको घर भेजते थे, इस प्रथा को अंग्रेज...