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Showing posts from August, 2021

टेस्ट ट्यूब बेबी गीता प्रेस

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धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी। उसके 100 पुत्र और एक पुत्री। सभी लोग सवाल करते हैं कि जब 100 वें पुत्र ने जनम लिया तब पहले पुत्र की आयु क्या थी ? अब जो अंड भगत है वह सिर्फ इतना ही जवाब देते है या यूं कहो कि जवाब देने की जगह उल्टा सवाल करते है कि स्टेम सेल का नाम सुना है, टेस्ट ट्यूब बेबी का नाम सुना है ? यानी वह कहना तो चाहते है कि टेस्ट ट्यूब बेबी की तरह एक साथ 101 बच्चों का निर्माण टेस्ट ट्यूब में किया गया, पर कह नहीं पाते। आधुनिक विज्ञान ने पुरुष का स्पर्म और स्त्री का अंडाणु को लेबोरेटरी या टेस्ट ट्यूब में मिलन करवाया जाता है । जिससे भ्रूण तैयार होता है। स्पर्म और अंडाणु के मिलन के 5 दिन पश्चात ही औरत के गर्भ में डाल दिया जाता है। 9 महीने पश्चात बच्चा पूर्ण विकसित हो कर बाहर आ जाता है। स्पर्म और अंडाणु में एक कोशिका के मुकाबले आधे आधे गुण सूत्र होते है। पुरुष स्पर्म में पुरुष कोशिका के आधे गुण सूत्र और अंडाणु में स्त्री की कोशिका के आधे गुण सूत्र। मिलने से एक पूर्ण नई कोशिका का निर्माण होता है। वैज्ञानिक यह कोशिश कर रहे है कि अंडाणु से स्त्री के गुण सूत्र निकाल कर पुरुष कोशिका से पूरे...

कहानी_देश_भक्त_भगत_सिंह_जी_की_आस्तिक_से_नास्तिक

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#कहानी_देश_भक्त_भगत_सिंह_जी_की_आस्तिक_से_नास्तिक अगर आप सच्चे देशभक्त है तो भगतसिंह जी के जीवन कहानी को जरूर पढ़ेंगे। और आज जो आडंबर ढकोसला करके देश को बहुत पीछे करने की साजिश चल रही है उसे समझ पाएंगे।  23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में भगत सिंह और उनके साथी हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर चढ़ गए थे. शहीद भगत सिंह खुद को एक पक्का नास्तिक मानते थे. अंतिम समय तक उन्होंने ईश्वर की सत्ता को स्वीकार नहीं किया. जेल में रहते हुए उन्होंने 'मैं नास्तिक क्यों हूं' शीर्षक से एक लेख लिखा था. इस लेख में उन्होंने ईश्वर और धर्म की सत्ता पर अनेक तर्कपूर्ण सवाल खड़े किए हैं. यहां इस लेख के कुछ अंश पढ़िए और जानिए ईश्वर और धर्म पर क्रान्तिकारी भगत सिंह के विचार..मैंने तो ईश्वर पर विश्वास करना तब छोड़ दिया था, जब मैं एक अप्रसिद्ध नौजवान था. मेरे बाबा, जिनके प्रभाव में मैं बड़ा हुआ, एक रूढ़िवादी आर्य समाजी हैं. एक आर्य समाजी और कुछ भी हो, नास्तिक नहीं होता. अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद मैंने डी. ए. वी. स्कूल, लाहौर में प्रवेश लिया और पूरे एक साल उसके छात्रावास में रहा. वहाँ सुबह और शा...

आचार्य चाणक्य कहते हैं

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#हमें कुछ समय के लिए आचार्य  चाणक्य को अपना मार्गदर्शक बनाकर और अनुकूलनवादी रणनीति अपनाकर लोकतंत्र अथवा जनता की लड़ाई लड़नी चाहिए... आचार्य चाणक्य कहते हैं : "संकट में अनुकूलन का मार्ग अपनाने पर ही रक्षा संभव है ।" हमारा कहना है रक्षा भी होगी और हम अपना कार्य भी बख़ूबी कर सकते हैं...कार्य अर्थात आंदोलन या क्रांतिकारी अभियान आगे बढ़ा सकते हैं । चाणक्य यह भी कहते हैं कि शत्रु को शत्रु की ही नीति एवं हथियारों से परास्त करो । अनुकूलन और शत्रु की नीति...इन दोनों सूत्रों को मिला दें तो हमारे लिए एक शानदार रास्ता निकलता है...वह रास्ता है कि हम महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता के पद से हटाकर गुरु रवींद्र नाथ टैगोर को राष्ट्रपिता बनाए जाने संबंधी आंदोलन छेड़ें...इस आंदोलन के लिए शानदार राष्ट्रीय तर्क हमारे पास है क्योंकि गांधी ने सरदार भगतसिंह, सुभाष चंद्र बोस और सरदार वल्लभभाई पटेल इन तीनों के साथ बेईमानी और अनैतिक तथा राष्ट्र विरोधी व्यवहार किया...यह इतना बड़ा अपराध है कि उन्हें राष्ट्रपिता की उपाधि देना तो दूर सम्मान से याद करना भी इस राष्ट्र और यहां के जन-गण का अपमान है......

क्या अंग्रेज बुरे थे?

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*👉 क्या अंग्रेज बुरे थे? 🤔* *#नरबलि :-*  जो कि शूद्रों की दी जाती थी। अंग्रेजों ने इसे रोकने के लिए 1830 में #कानून बनाया था। *#ब्राह्मण_जज_पर_रोक :-*  सन 1919 ईस्वी में अंग्रेजों ने ब्राह्मणों के जज बनने पर रोक लगा दी थी, अंग्रेजों ने कहा था कि इनका चरित्र न्यायिक नहीं होता है। *#शासन_में_ब्राह्मण :-* शासन व्यवस्था पर ब्राह्मणों का 100% कब्जा था। अंग्रेजों ने इन्हें 2.5% पर लाकर खड़ा कर दिया था। *#सम्पत्ति_का_अधिकार :-*  अंग्रेजों ने अधिनियम 11 के तहत शूद्रों को 1795 ईस्वी में संपत्ति रखने का अधिकार दिया था। *#देवदासी_प्रथा :-*  अंग्रेजों ने ही बंद कराई, इस प्रथा में यह होता था कि शूद्र समाज की लडकियाँ #मंदिरों_में_देवदासी के रूप में रहती थीं,पंडा-पुजारी उनके साथ छोटी उम्र में बलात्कार करना शुरू कर देते थे और उनसे जो बच्चा पैदा होता था , उसे हरिजन कहते थे। *#नववधू_शुद्धिकरण_प्रथा :-*  सन 1819 से पहले किसी शूद्र की शादी होती थी, तो ब्राह्मण उसका शुद्धीकरण करने के लिए नववधू को 3 दिन अपने पास रखते थे, उसके उपरांत उसको घर भेजते थे, इस प्रथा को अंग्रेज...

हर रोज टीवी चैनल गधे छोड़ जाते हैं

गधा पेड़ से बंधा था। शैतान आया और उसे खोल गया। गधा मस्त होकर खेतों की ओर भाग निकला और खड़ी फसल को खराब करने लगा। किसान की पत्नी ने यह देखा तो गुस्से में गधे को मार डाला। गधे की लाश देखकर गधे के मालिक को बहुत गुस्सा आया और उसने किसान की पत्नी को गोली मार दी।  किसान पत्नी की मौत से इतना गुस्से में आ गया कि उसने गधे के मालिक को गोली मार दी। गधे के मालिक की पत्नी ने जब पति की मौत की खबर सुनी तो गुस्से में बेटों को किसान का घर जलाने का आदेश दिया। बेटे शाम में गए और मां का आदेश खुशी-खुशी पूरा कर आए। उन्होंने मान लिया कि किसान भी घर के साथ जल गया होगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। किसान वापस आया और उसने गधे के मालिक की पत्नी और बेटों, तीनों की हत्या कर दी। इसके बाद उसे पछतावा हुआ और उसने शैतान से पूछा कि यह सब नहीं होना चाहिए था। ऐसा क्यों हुआ? शैतान ने कहा>  मैंने कुछ नहीं किया। मैंने सिर्फ गधा खोला लेकिन तुम सबने रिऐक्ट किया, ओवर रिऐक्ट किया और अपने अंदर के शैतान को बाहर आने दिया।  इसलिए अगली बार किसी का जवाब देने, प्रतिक्रिया देने, किसी से बदला लेने से पहले एक लम्हे के लिए रुकना और...