टेस्ट ट्यूब बेबी गीता प्रेस
धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी। उसके 100 पुत्र और एक पुत्री। सभी लोग सवाल करते हैं कि जब 100 वें पुत्र ने जनम लिया तब पहले पुत्र की आयु क्या थी ? अब जो अंड भगत है वह सिर्फ इतना ही जवाब देते है या यूं कहो कि जवाब देने की जगह उल्टा सवाल करते है कि स्टेम सेल का नाम सुना है, टेस्ट ट्यूब बेबी का नाम सुना है ? यानी वह कहना तो चाहते है कि टेस्ट ट्यूब बेबी की तरह एक साथ 101 बच्चों का निर्माण टेस्ट ट्यूब में किया गया, पर कह नहीं पाते।
आधुनिक विज्ञान ने पुरुष का स्पर्म और स्त्री का अंडाणु को लेबोरेटरी या टेस्ट ट्यूब में मिलन करवाया जाता है । जिससे भ्रूण तैयार होता है। स्पर्म और अंडाणु के मिलन के 5 दिन पश्चात ही औरत के गर्भ में डाल दिया जाता है। 9 महीने पश्चात बच्चा पूर्ण विकसित हो कर बाहर आ जाता है। स्पर्म और अंडाणु में एक कोशिका के मुकाबले आधे आधे गुण सूत्र होते है। पुरुष स्पर्म में पुरुष कोशिका के आधे गुण सूत्र और अंडाणु में स्त्री की कोशिका के आधे गुण सूत्र। मिलने से एक पूर्ण नई कोशिका का निर्माण होता है। वैज्ञानिक यह कोशिश कर रहे है कि अंडाणु से स्त्री के गुण सूत्र निकाल कर पुरुष कोशिका से पूरे के पूरे गुण सूत्र जो कि कोशिका के न्यूक्लस में होते है, डाल दिए जाएं जबकि पुरुष स्पर्म में आधे होते हैं। इसको कोलोन विधि कहते हैं। इस तरह नव जन्मे बच्चे में पूरे के पूरे गुण उस से मिलते है जिसकी कोशिका से न्यूक्लस लिया गया हो। भ्रूण के बनते ही दो तीन दिन तक इसको मादा के गर्भ में डाल दिया जाता है। निश्चित अवधि पर विकसित हो कर बच्चा बाहर आ जाता है। यह विधि आदमियों पर लाख कोशिशों के बावजूद कामयाब नहीं हुई है। भेड़ और कुछ और जानवरों पर कामयाबी पाई हैं।
स्टेम सेल यानी स्टेम कोशिका एक विशेष प्रकार की कोशिका है जो अपनी जैसी कोशिकाओं का निर्माण करती है और उनमें क्षमता होती है कि वह पूर्ण शरीर या पूर्ण अंग में विकसित हो जाए। अंड और स्पर्म के मिलन से भी स्टेम सेल का निर्माण होता है।
मैं कोई विज्ञान का विद्यार्थी नहीं रहा लेकिन साधारण जानकारी के लिए लिखा है ताकि इस का मुकाबला हम गांधारी के 101 पुत्र/पुत्री पैदा होने की प्रक्रिया से मुकाबला कर सकें। बहस सिर्फ गांधारी के 101 बच्चों के पैदा होने की प्रक्रिया को विज्ञान से जोड़ने पर केन्द्रित होनी चाहिए।
1. गांधारी के ससुर व्यास ने वरदान दिया 100 पुत्र होने का । वरदान वाली बात को विज्ञान से कैसे जोड़ेंगे। क्या कोलोन विधि उसी पर काम करेगी जिसको वरदान मिला हो ? आदीपर्व 114 वा अध्याय (1)
2. 2 वर्ष गर्भ बना रहा और जब कुंती के पहला बच्चा हुआ युधिष्ठिर तो गांधारी को चिंता हुई और जबरदस्ती प्रहार करके गर्भ गिरा दिया। पेट से निकला एक लोहे के समान सख्त पिंड ( बॉल ball समझा जा सकता है ) गांधारी उस को फेंकना चाहती थी। ( 2) आदीपर्व 114 वा अध्याय
3. तब फिर भगवान व्यास जी आ गए। उसमे कहा कि मेरा वरदान गलत नहीं हो सकता। 100 मटके या कुंड मंगवाए, जिसमें घी भरा हुआ था। गर्भ से निकले पिंड को पानी से सिंचित किया गया। ऐसा करने से 100 या 101 अंगूठे के एक पोरुए जितने टुकड़े हो गए। एक एक टुकड़े को एक एक घी से भरे घड़े में रखा गया। जिसमे सबसे पहला टुकड़ा डाला वह सबसे बड़ा दुर्योधन बना। इस तरह छोटे और बड़े का निश्चय हुआ। ( 1 से 3 ) आदीपर्व 114 वा अध्याय
4. वह घड़े गुप्त जगह पर रखे गए और फिर दो साल पड़े रहे। तब जा कर बच्चे निकले। (3) आदीपर्व 114 वा अध्याय
अगर वाकई में कोई विज्ञान था तो उसके होने का फायदा क्या ? अब कुछ कर के दिखाओ। यह थोड़े होगा कि आज काम विदेशी वैज्ञानिक करेंगे और हम अपनी पीठ थपथपाएंगें कि देखा हमारी महाभारत में तो पहले से लिखा हुआ था। अभी तो विज्ञान बहुत पीछे है जी।
अगर इस तरह से विज्ञान से कोई भरपूर बन जाता तो मैं भी कोई कल्पनिक कहानी लिख देता हूं। साबित मुझे थोड़े करना है। करने वाले विज्ञानी करेंगे। जब थोड़ा कुछ कर देंगे तो ताली पीटूंगा कि विज्ञान तो अभी मुझ से बहुत पीछे है, मैने तो पहले ही लिख दिया था।
अपनी विज्ञानिकता आधुनिक विज्ञान से मिला कर क्यों करते हो ? 2 साल पेट ने गर्भ क्यों रहा इसका जवाब दो। 2 साल घी से भरे मटके में क्यों पढ़े रहे, 9 महीने या 4 साल क्यों नहीं? क्या सिर्फ घी से भ्रूण का पोषण हो सकता है ? 9 महीने भ्रूण को विकसित होने के लिए लगते हैं, विज्ञान को तब मानेंगे जब यह समय कम हो जाए, 30 दिन, 60 दिन, 90 दिन इत्यादि। ऐसा कोई कारनामा कर के दिखाओ जिससे भ्रूण पूरा समय गर्भ से बाहर ही विकसित हो। अंध भक्ति और मूर्खता में कोई फर्क नहीं है। कुछ लोग जानबूझ कर लोगों को मूर्ख बने रहना देना चाहते है। ताकि उनकी मुफ्त की कमाई चलती रहे और वे श्रेष्ठ बने रहें। लानत भेजो ऐसी श्रेष्ठता पर। इतना बड़ा विज्ञान था तो धृतराष्ट्र को क्या जानबूझ कर अंधा रखा गया था ? आज का विज्ञान तो आंख प्रत्यारोपण भी कर सकता है। अब कुछ अंड भगत इस पर बहस करेंगे कि आधुनिक विज्ञान भी जन्मजात अंधे की आंख ठीक नहीं कर सकता। ठीक है । आधुनिक विज्ञान की बात क्यों करते हो। अपने वैदिक विज्ञान की बात करो। हाथी का सिर लगाया जा सकता है, सिर्फ आंखे क्यों नहीं लगाई जा सकती थी? महाभारत युद्ध के समय व्यास ने अपने अंधे पुत्र धृतराष्ट्र को दिव्य दृष्टि देने के पूछा। भीष्म पर्व 2 सरा अध्याय (4) यह दिव्य दृष्टि बालक धृतराष्ट्र को क्यों नहीं दी। यह कोन सा विज्ञान है कि अगर स्त्री से कोई अनजान कुरूप आदमी संभोग करे और स्त्री डर के मारे आंखे बन्द कर ले तो बच्चा अंधा पैदा होगा या डर के मारे पीली पढ़ जाए तो बच्चा पीला ( पांडु) पैदा होगा। आदीपर्व 104 वा अध्याय (5 और 6) आज कल तो बलात्कार से जो बच्चे पैदा होते है वह तो नॉर्मल ही होते है। यहां तो किसी विज्ञान की जरूरत ही नहीं। गांधारी के देवर पांडु को श्राप था कि वह मैथुन करेगा तो कर नहीं पाएगा मृत्यु हो जाएगी। बच्चे पैदा करने के लिए मैथुन की जरूरत ही क्या थी। टेस्ट ट्यूब बेबी का विज्ञान उस पर काम क्यों नहीं कर सकता था ? क्यों यम - धर्म के देवता को और वरुण को और इन्द्र को बुलाया। क्यों अश्वनी कुमारों को बुलाया ? क्यों कुंती का समागम दूसरों से करवाया ( समागम शब्द मेरा नहीं महाभारत का है।) आदीपर्व 121, 122 अध्याय ( 7 से 9)
गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित महाभारत के संबंधित पन्ने पोस्ट कर दिए है। ऊपर ( ) में दिय गए नंबर ही पन्नो पर लगा दिए हैं।
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