सबसे बड़े नेता बनकर उभरे तेजस्वी
सत्ता की स्टियरिंग नीतीश के पास होगी, इस पर भरोसा कर 2015 में जनता ने जनादेश दिया। तब वो उसी कथित जंगलराज के मुखिया लालू यादव के साथ चुनाव लड़ रहे थे जिसका भय दिखाकर 2020 में वोट मांगा। लेकिन 2020 का जनादेश बताता है कि नीतीश की ड्राइविंग स्किल पर अब जनता को उतना भरोसा नहीं रहा। जनादेश ने साफ कर दिया कि छोटे भाई नीतीश कुमार न सिर्फ बीजेपी की बैसाखी पर बिहार की गाड़ी चलाएंगे बल्कि मुकेश सहनी और जीतनराम मांझी भी उन्हें डिक्टेट करेंगे।
पोल पिच पर बीजेपी ने बैटिंग की और जेडीयू की स्ट्राइक रेट को स्लो कर दिया। पार्टी के नाम पर चिराग ने धारदार बोलिंग की। स्ट्राइक रेट के मामले में जो जेडीयू (JDU) के साथ एनडीए (NDA) में हुआ है, वही हाल कांग्रेस के साथ हुआ है महागठबंधन में। शायद आरजेडी के वोटर्स अपने को कांग्रेस के साथ इतना एलाइन नहीं कर पाए जिसका खामियाजा कांग्रेस को उठाना पड़ रहा है। कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ रही थी और उनमें से 19 सीटों पर ही जीत हासिल हुई।
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